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सिद्धार्थनगर। जनपद के बढ़नी, इटवा, शोहरतगढ़ और खुनुवा जैसे सीमावर्ती इलाकों में पान मसाला और सिगरेट की कालाबाजारी का एक बड़ा खेल सामने आ रहा है। कुछ रसूखदार डिस्ट्रीब्यूटर्स ने ‘कृत्रिम किल्लत’ पैदा कर शुद्ध प्लस, कमला पसंद और नामी सिगरेट ब्रांड्स का लाखों का अवैध स्टॉक डंप कर रखा है। आलम यह है कि इन उत्पादों को निर्धारित खुदरा मूल्य (MRP) से कहीं अधिक दामों पर गुपचुप तरीके से बेचा जा रहा है, जिससे न केवल उपभोक्ताओं की जेब पर डाका डाला जा रहा है, बल्कि सरकार को भी लाखों के राजस्व (GST) का चूना लगाया जा रहा है।
छोटे दुकानदार और ग्राहकों के बीच टकराव
क्षेत्र के छोटे दुकानदारों का आरोप है कि डिस्ट्रीब्यूटर्स उन्हें पीछे से ही माल ऊंचे दामों पर दे रहे हैं। जब छोटा दुकानदार अपनी लागत निकालने के लिए ग्राहकों से अधिक पैसे मांगता है, तो आए दिन दुकानों पर झड़प और विवाद की स्थिति बन रही है। व्यापारियों का कहना है कि डिस्ट्रीब्यूटर्स बिना किसी पुख्ता रिकॉर्ड या रसीद के माल की सप्लाई कर रहे हैं, जो सीधे तौर पर टैक्स चोरी और तानाशाही को दर्शाता है। प्रशासनिक चुप्पी पर उठे सवाल
कोटिया, ढेकहरी और आसपास के क्षेत्रों में फल-फूल रहे इस सिंडिकेट ने सप्लाई चेन की पारदर्शिता को पूरी तरह खत्म कर दिया है। स्थानीय जनता और आक्रोशित व्यापारियों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि संदिग्ध गोदामों की तत्काल जांच कर स्टॉक का मिलान किया जाए। यदि जल्द ही इन ‘मसाला माफियाओं’ पर नकेल नहीं कसी गई, तो छोटे व्यापारी सड़कों पर उतरकर आंदोलन करने को मजबूर होंगे।