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बढ़नी (सिद्धार्थनगर): विकास खंड बढ़नी में पशु चिकित्सा सेवाएं पूरी तरह पटरी से उतर चुकी हैं। क्षेत्र की 77 ग्राम पंचायतों की जिम्मेदारी संभालने वाला मुख्य पशु अस्पताल इन दिनों खुद ‘बीमार’ नजर आ रहा है। अस्पताल की कमान डॉक्टर के बजाय पैरावेट्स के हाथों में है, जिससे क्षेत्र के पशुपालकों में भारी आक्रोश है।
अस्पताल से गायब मिले डॉक्टर, लटका रहा ताला
ब्लॉक मुख्यालय पर स्थित इस अस्पताल की स्थिति यह है कि यहाँ पशु चिकित्सक राकेश कुमार अक्सर नदारद रहते हैं। सोमवार दोपहर को भी डॉक्टर के कक्ष में ताला लटकता पाया गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि अस्पताल कब खुलता है और कब बंद होता है, इसका कोई ठिकाना नहीं है। प्रशिक्षण के बिना हो रहा टीकाकरण
वर्तमान में राष्ट्रीय कार्यक्रम के तहत खुरपका-मुंहपका (FMD) रोग से बचाव के लिए टीकाकरण अभियान चल रहा है। सूत्रों की मानें तो कई ऐसे पैरावेट्स को वैक्सीन की जिम्मेदारी दी गई है जिनके पास उचित प्रशिक्षण तक नहीं है।
* जोखिम: बिना विशेषज्ञ की देखरेख के टीकाकरण और इलाज से पशुओं के स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है।
* लापरवाही: नियमों को ताक पर रखकर अस्पताल से लेकर वैक्सीन तक का जिम्मा अप्रशिक्षित हाथों में सौंप दिया गया है। पशुपालकों ने की कार्रवाई की मांग
पशुपालकों का आरोप है कि क्षेत्र में पशुओं के स्वास्थ्य के साथ लगातार खिलवाड़ किया जा रहा है। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि ड्यूटी से गायब रहने वाले चिकित्सक और टीकाकरण अभियान में लापरवाही बरतने वाले जिम्मेदार लोगों के खिलाफ तत्काल और सख्त कार्रवाई की जाए।