Thursday, February 12, 2026
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सिद्धार्थनगर में मॉब लिंचिंग: चोरी के शक में भीड़ ने राहगीर को बेरहमी से पीटा, पुलिस ने बचाया

गुरु जी की कलम से
सिद्धार्थनगर। ढेबरुआ थाना क्षेत्र के परसोहिया चौराहे पर चोरी के शक में भीड़ ने एक राहगीर को बेरहमी से पीटा, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया। पुलिस ने समय पर पहुंचकर घायल व्यक्ति को बचाया और मामले की जांच शुरू कर दी है।
यह घटना मंगलवार दोपहर करीब 1 बजे की है। जानकारी के अनुसार, संतराम निषाद और उनके साथी सहजराम निषाद एक नाबालिग लड़की के साथ अपनी स्कूटी पर हाटी से मछली लेकर घर जा रहे थे।

परसोहिया चौराहे के पास वे सड़क किनारे नल पर पानी पीने के लिए रुके। इसी दौरान, कुछ ग्रामीणों ने उन्हें संदिग्ध समझकर घेर लिया।

ग्रामीणों का आरोप था कि ये लोग घर में घुसकर चोरी करने के इरादे से आए थे। उन्होंने जब इनकी तलाशी ली, तो एक चाकू मिला, जिसके बाद भीड़ ने बिना कुछ सोचे-समझे ‘चोर-चोर’ चिल्लाते हुए उन्हें पीटना शुरू कर दिया। इस मारपीट में संतराम निषाद को सिर में गंभीर चोटें आईं।

वहीं, पीड़ित पक्ष ने अपने शिकायत पत्र में इन आरोपों को झूठा बताया है। सूचना मिलने पर ढेबरुआ पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची और तीनों को भीड़ से बचाकर थाने ले आई। पुलिस की प्रारंभिक जांच में पाया गया कि तीनों निर्दोष थे और उनका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं था। उनके गाँव के प्रधानों ने भी थाने आकर इस बात की पुष्टि की है।
पुलिस अधीक्षक डॉ. अभिषेक महाजन सहित अन्य अधिकारियों ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत पुलिस को देने की अपील की है। फिलहाल, पुलिस मामले की जांच कर रही है और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने का आश्वासन दिया है। इस संबंध में थानाध्यक्ष नारायण लाल श्रीवास्तव से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उनका फोन नहीं उठ सका।

कानून को हाथ में न लें: अफवाहों से बचें
अक्सर देखा गया है कि सोशल मीडिया या अन्य माध्यमों से फैली अफवाहों के चलते लोग बिना सच्चाई जाने कानून को अपने हाथ में ले लेते हैं। ऐसी घटनाएं न सिर्फ निर्दोष लोगों की जान जोखिम में डालती हैं, बल्कि समाज में अराजकता भी फैलाती हैं।
पुलिस-प्रशासन लगातार लोगों से अपील कर रहा है कि किसी भी तरह की संदिग्ध गतिविधि दिखने पर तुरंत पुलिस को 112 नंबर या नजदीकी थाने पर सूचित करें। किसी भी व्यक्ति पर हमला करना या कानून तोड़ना एक गंभीर अपराध है, जिसके लिए कड़ी कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। यह हम सबकी जिम्मेदारी है कि हम अफवाहों पर यकीन न करें और एक जिम्मेदार नागरिक की तरह काम करें।