सिद्धार्थनगर: खूनी संघर्ष में घायल महिला की मौत के बाद बवाल, परिजनों ने पुलिस पर लगाया आरोपियों को बचाने का आरोप , स पा नेताओं ने पुलिस पर उठाए गंभीर सवाल
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सिद्धार्थनगर। उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर जिले के ढेबरुआ थाना क्षेत्र के तालकुंडा (केवटलिया टोला) में खूनी संघर्ष का शिकार हुई 49 वर्षीय महिला कृष्णावती की बुधवार को इलाज के दौरान मौत हो गई। महिला की मौत के बाद जहां पुलिस ने कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है, वहीं पीड़ित परिवार ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए कुछ मुख्य आरोपियों के नाम एफआईआर से बाहर रखने का आरोप लगाया है।
मामूली कहासुनी से शुरू हुआ था खूनी खेल
घटना 8 फरवरी की है, जब पड़ोसियों के बीच मामूली बात पर विवाद शुरू हुआ। देखते ही देखते विवाद इतना बढ़ा कि हमलावरों ने लोहे की रॉड, डंडों और पाइप से कृष्णावती पर जानलेवा हमला कर दिया। गंभीर रूप से घायल महिला को पीएचसी बढ़नी और फिर जिला अस्पताल ले जाया गया। हालत बिगड़ती देख उन्हें गोरखपुर रेफर किया गया था, लेकिन बुधवार सुबह एक निजी अस्पताल में उन्होंने दम तोड़ दिया।
पुलिस की कार्रवाई और दर्ज मुकदमे
ढेबरुआ थाना अध्यक्ष (एसओ) नारायण लाल श्रीवास्तव के मुताबिक, मृतका की देवरानी बिन्दू की तहरीर पर पुलिस ने घटना के बाद ही पांच लोगों— सुरेंद्र चौहान, सरिता, संजना, सविता और शीला —के खिलाफ मारपीट का केस दर्ज कर लिया था। एसओ ने बताया कि अब मौत के बाद पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर मुकदमे में हत्या की धाराओं की वृद्धि की जाएगी।
पीड़ित परिवार का सनसनीखेज आरोप: “असली हमलावर अब भी बाहर”
एक तरफ जहां पुलिस 5 लोगों पर कार्रवाई की बात कर रही है, वहीं मृतका के पति लालजी चौहान ने समाजवादी पार्टी के जिलाध्यक्ष को पत्र लिखकर पुलिस पर पक्षपात का आरोप लगाया है। पीड़ित परिवार का कहना है कि पुलिस ने दहशत और प्रभाव के कारण मुख्य हमलावरों के नाम एफआईआर में शामिल नहीं किए हैं। परिवार ने मांग की है कि इन 6 लोगों को भी नामजद कर जेल भेजा जाए।
फिलहाल, पुलिस शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजकर रिपोर्ट का इंतजार कर रही है, जबकि गांव में तनावपूर्ण शांति बनी हुई है।
स पा नेताओं ने पुलिसिया कार्य प्रणाली पर घेरा
घटना के बाद जिले के स पा नेताओं ने पुलिसिया कार्य प्रणाली पर गंभीर आरोप लगाते हुए घेरा।