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सिद्धार्थनगर। उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर जिले से न्यायपालिका और प्रशासन को चुनौती देने वाला एक गंभीर मामला सामने आया है। डुमरियागंज तहसील क्षेत्र के गिरधपुर गांव में कोर्ट के स्पष्ट स्थगन आदेश (Stay Order) के बावजूद दबंगों द्वारा जबरन निर्माण कार्य कराने का आरोप लगा है। इस मामले में पुलिस की कार्यप्रणाली और सत्ता पक्ष के हस्तक्षेप ने स्थानीय प्रशासन की निष्पक्षता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
क्या है पूरा मामला?
मामला गिरधपुर गांव के गाटा संख्या 88 से जुड़ा है। पीड़ित पक्ष के अनुसार, इस जमीन पर सिद्धार्थनगर कोर्ट ने 10 फरवरी 2026 तक यथास्थिति (Status Quo) बनाए रखने का आदेश जारी किया है। इसके बावजूद, गांव के कुछ रसूखदार व्यक्ति—रामू गुप्ता, राजकुमार गुप्ता, दीपक गुप्ता और चिंकू गुप्ता—कोर्ट और उपजिलाधिकारी (SDM) डुमरियागंज के आदेशों की सरेआम धज्जियां उड़ाते हुए निर्माण कार्य करा रहे हैं।
सत्ता के दबाव में पुलिस?
पीड़ित ने इस पूरे प्रकरण में भाजपा मंडल अध्यक्ष विनय पाठक पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। आरोप है कि मंडल अध्यक्ष थाने में बैठकर पुलिस पर दबाव बना रहे हैं, जिसके चलते निर्माण कार्य को बल मिल रहा है। पीड़ित का कहना है कि उन्होंने दो बार इटवा पुलिस को लिखित शिकायत दी और कोर्ट के आदेश की कॉपी भी सौंपी, लेकिन पुलिस ने मौके पर जाकर काम रुकवाने के बजाय मूकदर्शक बनी रही।
बताते चलें कि प्रशासनिक निष्पक्षता पर सवाल
कोर्ट के आदेश की अवहेलना और पुलिस की शिथिलता ने पूरे गांव में तनाव का माहौल बना दिया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर कोर्ट के आदेश सुरक्षित नहीं हैं, तो न्याय की उम्मीद किससे की जाए? अब देखना यह है कि डुमरियागंज तहसील प्रशासन और सिद्धार्थनगर पुलिस के आला अधिकारी इस मामले में क्या संज्ञान लेते हैं।