बढ़नी, सिद्धार्थनगर: भारत-नेपाल सीमा पर तैनात सशस्त्र सीमा बल (SSB) एक बार फिर मानवता के रखवाले बनकर सामने आया है। अपनी सतर्कता और प्रभावी खुफिया तंत्र के दम पर, SSB की 50वीं बटालियन ने मानव तस्करी के एक गंभीर प्रयास को विफल कर एक नाबालिग लड़की की जिंदगी बचाई। यह घटना न सिर्फ SSB के जवानों की मुस्तैदी को दर्शाती है, बल्कि यह भी साबित करती है कि वे सीमाओं की सुरक्षा के साथ-साथ हर नागरिक की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध हैं।
सोमवार को मिली एक खुफिया सूचना के आधार पर, SSB के जवानों ने बढ़नी चेकपोस्ट पर कड़ी निगरानी रखी। इसी दौरान, उन्होंने एक संदिग्ध लड़के और एक नाबालिग लड़की को रोका। सामान्य पूछताछ के दौरान ही जवानों को संदेह हुआ, और गहन पूछताछ में चौंकाने वाला खुलासा हुआ। लड़की को बहला-फुसलाकर नेपाल ले जाया जा रहा था।
जांच में पता चला कि लड़की उत्तर प्रदेश के संत कबीर नगर जिले की रहने वाली है, और उसे सिद्धार्थनगर जिले का 32 वर्षीय रामराज्य यादव घर छोड़ने का झांसा देकर नेपाल ले जा रहा था। मासूम लड़की को इस बात का जरा भी अंदाजा नहीं था कि उसे बहला-फुसलाकर एक अजनबी देश में ले जाया जा रहा है, जहां उसका भविष्य खतरे में पड़ सकता था।
यह कार्रवाई SSB की उस अटूट प्रतिबद्धता को दिखाती है जिसके तहत वे सीमा पार होने वाले अपराधों, खासकर मानव तस्करी जैसे जघन्य अपराधों के खिलाफ लगातार काम कर रहे हैं। बिना किसी देरी के, SSB ने दोनों को आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट (AHTU), सिद्धार्थनगर को सौंप दिया।
यह घटना उन सभी लोगों के लिए एक सबक है जो सोचते हैं कि सीमा पार कर ऐसे अपराधों को अंजाम देना आसान है। SSB के जवान न सिर्फ देश की भौगोलिक सीमाओं की रक्षा कर रहे हैं, बल्कि हर उस व्यक्ति की सुरक्षा भी सुनिश्चित कर रहे हैं, जो उनकी निगरानी में है। SSB का यह सराहनीय कार्य दर्शाता है कि उनकी ‘सेवा, सुरक्षा, बंधुत्व’ की शपथ केवल नारे नहीं, बल्कि उनके दैनिक कार्यों का हिस्सा है। उनकी यह बहादुरी और तत्परता समाज में एक सकारात्मक संदेश देती है कि हमारी सीमाएँ और उनके भीतर के लोग सुरक्षित हाथों में हैं।