तहसीलदार के स्थानांतरण की मांग को लेकर अधिवक्ताओं ने मुख्य सचिव व मुख्यमंत्री को भेजा ज्ञापन; न्यायिक कार्य से दूरी बनाई
निजाम अंसारी
सिद्धार्थनगर जिले के इटवा तहसील में बुधवार को बार एसोसिएशन के तत्वावधान में अधिवक्ताओं ने तहसीलदार कैलाश नाथ यादव के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। अधिवक्ताओं ने तहसील परिसर में जोरदार नारेबाजी करते हुए तहसीलदार के कार्य व्यवहार और कार्यप्रणाली पर गंभीर आरोप लगाए। आक्रोशित अधिवक्ताओं ने तहसीलदार के तत्काल स्थानांतरण की मांग की है।
अवैध वसूली और अमर्यादित व्यवहार का आरोप बार एसोसिएशन इटवा के अध्यक्ष गजेंद्र प्रताप सिंह के नेतृत्व में अधिवक्ताओं ने उपजिलाधिकारी (SDM) इटवा, जिलाधिकारी सिद्धार्थनगर, राजस्व परिषद अध्यक्ष (प्रयागराज) और मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपा। बार अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि:
तहसीलदार द्वारा अधिवक्ताओं और वादकारियों के साथ लगातार अमर्यादित व्यवहार किया जाता है।
दाखिल-खारिज (Mutation) और वसीयतनामा (Will) समेत विभिन्न राजस्व मामलों में अवैध रूप से धन की मांग की जाती है।
पत्रावलियों में समय से आदेश न देकर उन्हें अकारण लंबित रखा जाता है।
तहसीलदार द्वारा उच्च न्यायालय, सर्वोच्च न्यायालय और राजस्व परिषद की स्थापित व्यवस्थाओं व आदेशों पर अनुचित टिप्पणियां की जाती हैं।
इस कार्यव्यवहार से क्षुब्ध होकर अधिवक्ताओं ने न्यायिक कार्यों से पूरी तरह विरत (कार्य बहिष्कार) रहने का निर्णय लिया है।
तहसीलदार ने आरोपों को बताया बेबुनियाद वहीं दूसरी ओर, इटवा के तहसीलदार कैलाश नाथ यादव ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने अपना पक्ष रखते हुए कहा:
कुछ लोग न्यायालय की निष्पक्ष कार्यवाही को प्रभावित करना चाहते हैं और आए दिन अनुचित प्रस्ताव लेकर आते हैं।
वरासत के मामलों में नियमों के मुताबिक गवाहों को पेशकार के बजाय सीधे न्यायालय में प्रस्तुत करने को कहा जाता है, जिससे कुछ लोगों को आपत्ति है।
धारा 67 के तहत गांवों में जाकर निष्पक्ष जांच व आदेश करने पर भी विरोध जताया जा रहा है।
तहसीलदार का कहना है कि वे पूरी तरह से राजस्व परिषद के नियमों और विधिक प्रक्रियाओं का पालन करते हुए कार्य कर रहे हैं और लगाए गए सभी आरोप निराधार हैं।