Saturday, October 10, 2026
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किसानों के हक पर डाका: भारत-नेपाल सीमा पर 83 बोरी यूरिया खाद बरामद, चार तस्कर गिरफ्तार

Kapilvastupost

सिद्धार्थनगर। एक तरफ जहां देश का अन्नदाता अपनी धान की लहलहाती फसलों को बचाने और बेहतर पैदावार के लिए यूरिया खाद की एक-एक बोरी को तरस रहा है, वहीं दूसरी तरफ चंद पैसों के लालच में सीमा पार खाद की कालाबाजारी और तस्करी का घिनौना खेल बदस्तूर जारी है। उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर जिले से सटी भारत-नेपाल सीमा पर 43वीं वाहिनी सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) और स्थानीय पुलिस ने सख्त कार्रवाई करते हुए तस्करी कर नेपाल ले जाई जा रही 83 बोरी यूरिया खाद जब्त की है। इस दौरान चार आरोपियों को रंगे हाथ धर दबोचा गया।

पहली कार्रवाई: बाणगंगा सीमा चौकी के पास पिकअप और टेम्पो से 56 बोरी यूरिया जब्त एसएसबी की सीमा चौकी बाणगंगा की नाका पार्टी को सटीक सूचना मिली थी कि सीमा स्तंभ संख्या 557 के पास से यूरिया की बड़ी खेप नेपाल भेजने की तैयारी है। सतर्क जवानों ने जब संदिग्ध बोलेरो पिकअप और एक टेम्पो को घेरकर रोका और तलाशी ली, तो उसमें से 56 बोरी अवैध यूरिया खाद बरामद हुई। वाहन सवार आरोपी जंग बहादुर (25) और कैलाश (34) निवासी डोहरिया खुर्द, थाना शोहरतगढ़ खाद से जुड़ा कोई भी जायज दस्तावेज नहीं दिखा सके। अधिकारियों के अनुसार, यह खाद भारतीय बाजार से सस्ती दरों पर उठाकर नेपाल में ऊंचे दामों पर बेचने की नीयत से ले जाई जा रही थी। दोनों को वाहनों समेत पुलिस के हवाले कर दिया गया है।

दूसरी कार्रवाई: ककरहवा चौकी और पुलिस का संयुक्त ऑपरेशन, 27 बोरी यूरिया के साथ ई-ऑटो जब्त इसी क्रम में ककरहवा सीमा चौकी और यूपी पुलिस की संयुक्त नाका टीम ने अनधिकृत कच्चे रास्तों से नेपाल की तरफ बढ़ रहे एक इलेक्ट्रिक ऑटो को रोका। तलाशी में उसमें से 27 बोरी यूरिया बरामद की गई। ऑटो में सवार जितेंद्र गुप्ता (38) और रोहित गुप्ता (17) निवासी फरसादीपुर, थाना मोहाना कोई वैध कागजात पेश नहीं कर पाए। टीम ने ई-ऑटो और खाद को कब्जे में लेकर दोनों आरोपियों को मोहाना पुलिस को सौंप दिया।

संपादकीय टिप्पणी: अन्नदाता के पेट पर लात और प्रशासनिक तंत्र पर सवाल यह कार्रवाई एसएसबी और पुलिस की सतर्कता का प्रमाण जरूर है, लेकिन इसके पीछे की तस्वीर बेहद चिंताजनक और आक्रोश पैदा करने वाली है। वर्तमान समय में भारतीय किसानों को अपनी धान की फसल के लिए यूरिया की सबसे ज्यादा जरूरत है। तड़के सुबह से कतारों में खड़े होने के बाद भी कई किसानों को निराशा हाथ लगती है। ऐसे संवेदनशील समय में सब्सिडी वाली सरकारी यूरिया को गैर-कानूनी तरीके से नेपाल में मुनाफाखोरी के लिए बेचना सीधे तौर पर भारतीय किसानों के पेट पर लात मारने जैसा है।

भारतीय कृषि व्यवस्था को खोखला करने वाले इस ‘खाद माफिया’ के खिलाफ केवल जब्ती और इक्का-दुक्का गिरफ्तारियां काफी नहीं हैं। जब तक इन तस्करों की पूरी सप्लाई चेन और इनके आकाओं पर नकेल नहीं कसी जाएगी, तब तक हमारे किसानों के हक की चोरी होती रहेगी। सीमा पर गश्त बढ़ाने के साथ-साथ खाद वितरण केंद्रों पर भी कड़ी पारदर्शिता तय करनी होगी ताकि यह तय हो सके कि भारतीय सब्सिडी का लाभ सिर्फ और सिर्फ भारतीय किसानों को ही मिले।