परमात्मा उपाध्याय की रिपोर्ट
काठमांडू | नेपाल आज अपना 75वां राष्ट्रीय प्रजातंत्र दिवस पूरे उत्साह, श्रद्धा और लोकतांत्रिक उमंग के साथ मना रहा है। फागुन 7, साल 2007 (विक्रम संवत) के उस ऐतिहासिक दिन की याद में, जब जनक्रांति के बल पर दशकों पुराने निरंकुश राणा शासन का अंत हुआ था, आज देशभर में सार्वजनिक अवकाश घोषित किया गया है।
मुख्य समारोह काठमांडू के सैनिक मंच टुंडिखेल में आयोजित किया गया, जहाँ राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल की गरिमामयी उपस्थिति में शहीदों को याद किया गया। राष्ट्रपति ने अपने संदेश में स्पष्ट किया कि आज का संघीय लोकतांत्रिक गणराज्य और वर्तमान संविधान उसी 2007 साल की क्रांति की बुनियाद पर खड़ा है।
शहीदों का बलिदान और ऐतिहासिक ‘दिल्ली समझौता’
नेपाल में लोकतंत्र की नींव शहीद दशरथ चन्द, धर्मभक्त माथेमा, गंगालाल श्रेष्ठ और शुक्रराज शास्त्री के बलिदानों पर रखी गई है। इस संघर्ष में भारत की भूमिका अत्यंत निर्णायक रही।
किंग त्रिभुवन को शरण: जब राजा त्रिभुवन ने राणाओं के खिलाफ पलायन किया, तब तत्कालीन भारतीय प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने उन्हें शरण दी।
* मध्यस्थता: भारत की सक्रिय मध्यस्थता से ही ‘दिल्ली समझौता’ संभव हुआ, जिसने राणा शासन के अंत और संवैधानिक राजशाही व प्रजातंत्र की स्थापना का मार्ग प्रशस्त किया।
भारत: नेपाल का अटूट विकास और लोकतांत्रिक साझेदार
1951 से लेकर आज तक, भारत नेपाल के लोकतांत्रिक ढांचे को मजबूत करने में एक अभिभावक और मित्र की भूमिका निभाता आ रहा है।
* बुनियादी ढांचा: तराई क्षेत्र में सड़कों का जाल बिछाने से लेकर रेल संपर्क तक, भारत नेपाल का सबसे बड़ा विकास साझेदार है।
* आर्थिक एवं सैन्य सहयोग: नेपाल का अधिकांश विदेशी व्यापार भारत के साथ होता है। साथ ही, नेपाली सेना को प्रशिक्षण और आधुनिक उपकरण प्रदान करना दोनों देशों के रिश्तों का एक मजबूत स्तंभ है।
* तकनीकी सहायता: शिक्षा, स्वास्थ्य और तकनीकी क्षेत्रों में भारत का निरंतर सहयोग नेपाल की समृद्धि में सहायक सिद्ध हो रहा है। राष्ट्रपति पौडेल का संदेश: सुशासन और समृद्धि का संकल्प
राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने ज्ञात-अज्ञात शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि जनता की संप्रभुता ही नेपाली लोकतंत्र की आत्मा है। उन्होंने कामना की कि यह दिवस देश में स्थायी शांति, सुशासन और विकास के लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए प्रेरणा स्रोत बने।