Monday, April 13, 2026
बढ़नी

युवाओं का भविष्य निगल रहा नशे का जहर: भारत-नेपाल सीमा पर फल-फूल रहा अवैध कारोबार, प्रशासन की चुप्पी पर उठे सवाल

Kapilvastupost
सिद्धार्थनगर / बढ़नी: देश को एक मजबूत और उज्जवल भविष्य देने के लिए युवाओं को नशे की लत से दूर रखना अनिवार्य है, लेकिन वर्तमान स्थितियां इसके विपरीत नजर आ रही हैं। जनपद सिद्धार्थनगर के ढेबरुआ थाना क्षेत्र अंतर्गत बढ़नी चौकी और आसपास के इलाकों में स्मैक तथा अन्य प्रतिबंधित नशीले पदार्थों का कारोबार इन दिनों चरम पर है। स्थिति यह है कि कल तक गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वाले तस्कर आज नशे की काली कमाई से लखपति बन बैठे हैं, जबकि क्षेत्र का युवा वर्ग अपना भविष्य बर्बाद कर रहा है।
जेल से छूटते ही फिर सक्रिय हुए नशे के सौदागर
जानकारों का कहना है कि कुछ माह पहले पुलिसिया सख्ती के कारण कई बड़े नशा कारोबारी सलाखों के पीछे भेजे गए थे। इससे इलाके में अपराध पर अंकुश लगा था। लेकिन हाल ही में जेल से छूटकर बाहर आते ही इन अपराधियों ने न केवल अपना पुराना धंधा शुरू कर दिया है, बल्कि अब इसमें अपने परिवार के सदस्यों को भी शामिल कर लिया है। अवैध कारोबार का यह पुनरुत्थान स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली और निगरानी पर गंभीर सवालिया निशान खड़े करता है।

कुंभकरणी नींद में प्रशासन?
स्थानीय निवासियों का आरोप है कि पुलिस प्रशासन के कुछ कर्मियों को इस बात की पूरी जानकारी है कि बढ़नी नगर पंचायत और सरहदी इलाकों में नशा कहाँ बिक रहा है और इसमें कौन-कौन संलिप्त है। इसके बावजूद, ठोस कार्रवाई न होना आश्चर्य और चिंता का विषय है। लोगों का मानना है कि जब तक प्रशासन की नींद नहीं टूटेगी, तब तक इन तस्करों के हौसले पस्त नहीं होंगे।
सीमावर्ती इलाकों में गहराता संकट
भारत-नेपाल सीमा के सरहदी इलाकों में नशे का जाल तेजी से फैल रहा है। शिक्षा और रोजगार की राह छोड़कर युवा स्मैक और अन्य घातक नशों की गिरफ्त में आ रहे हैं। यह न केवल परिवारों को तबाह कर रहा है, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भी खतरे की घंटी है। नशाग्रस्त युवा न तो परिवार का सहारा बन पा रहे हैं और न ही देश की प्रगति में योगदान दे पा रहे हैं।
सामाजिक और कानूनी लड़ाई की आवश्यकता
इस गंभीर समस्या के समाधान के लिए केवल पुलिस पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है। जनता, अभिभावकों, राजनीतिक दलों, धर्मगुरुओं और समाज के बुजुर्गों को एकजुट होकर नशा माफियाओं के विरुद्ध सामाजिक और कानूनी लड़ाई लड़नी होगी। स्कूलों, कॉलेजों और सामाजिक संगठनों को मिलकर जागरूकता अभियान चलाना होगा ताकि आने वाली पीढ़ी को इस दलदल से बचाया जा सके।

बताते चलें कि नशे के खिलाफ यह संघर्ष अब टाला नहीं जा सकता। यदि प्रशासन ने कठोर कदम नहीं उठाए और समाज जागरूक नहीं हुआ, तो यह ‘जहर’ हमारे राष्ट्र की नींव को खोखला कर देगा।