नेपाल की बहुओं को मिला वोट का अधिकार: भारत के बाहर जन्मे नागरिकों के लिए पंजीकरण की नई व्यवस्था शुरू
बिहार में हुवे SIR के बाद किसी भी नागरिक को कहीं जाना नहीं पड़ा
परमात्मा प्रसाद उपाध्याय की रिपोर्ट
लखनऊ/ बढ़नी : भारत और नेपाल के बीच ‘रोटी-बेटी’ के रिश्तों में आने वाली एक बड़ी कानूनी बाधा अब दूर हो गई है। उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए भारत के बाहर जन्मे नागरिकों के लिए मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने की नई व्यवस्था लागू कर दी है। इस फैसले से विशेष रूप से उन परिवारों में खुशी का माहौल है जिनकी बहुएं नेपाल या अन्य देशों से विवाह कर भारत आई हैं।
क्या थी समस्या?
अब तक भारत के बाहर जन्मे नागरिक फॉर्म-6 या फॉर्म-6A के माध्यम से मतदाता बनने के लिए आवेदन नहीं कर पाते थे। तकनीकी रूप से ऑनलाइन सिस्टम में जन्म स्थान के रूप में ‘भारत से बाहर’ (Outside India) चुनने का कोई विकल्प मौजूद नहीं था। इस कारण नेपाल से ब्याह कर आई बहुएं और विदेश में जन्मे भारतीय नागरिक मताधिकार से वंचित रह जाते थे।
निर्वाचन आयोग का नया समाधान
निर्वाचक नामावली के विशेष प्रगाढ़ पुनरीक्षण-2026 के तहत अब इस तकनीकी समस्या को हल कर लिया गया है:
ऑफलाइन आवेदन: पात्र नागरिक अब फॉर्म-6 या फॉर्म-6A को भौतिक (Physical) रूप से भरकर संबंधित अधिकारी को दे सकते हैं।
नया विकल्प: ईआरओ नेट (ERO Net) और बीएलओ ऐप (BLO App) में अब ‘Outside India’ चुनने का विकल्प और देश का नाम लिखने के लिए ‘Text Box’ सक्रिय कर दिया गया है।
प्रभावी क्रियान्वयन: सभी निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों और बीएलओ को निर्देश दिए गए हैं कि वे इन आवेदनों को प्राथमिकता पर स्वीकार करें।
भारत और नेपाल में हर्ष
इस फैसले की जानकारी मिलते ही सीमावर्ती क्षेत्रों सहित पूरे प्रदेश में खुशी की लहर है। वर पक्ष के लोग जहां अपनी बहुओं के लोकतांत्रिक अधिकार सुरक्षित होने पर खुश हैं, वहीं नेपाल में वधू पक्ष के लोगों ने भारत सरकार के इस कदम की सराहना की है। यह नई व्यवस्था न केवल मताधिकार सुनिश्चित करेगी, बल्कि दोनों देशों के पारिवारिक संबंधों को और मजबूती प्रदान करेगी।
| विवरण | बिहार (संपन्न) | उत्तर प्रदेश (वर्तमान स्थिति) |
| मतदाताओं की कटौती | बिहार में लगभग 65 लाख नाम काटे गए (कुल वोटर्स का करीब 6-8%)। | यूपी के ड्राफ्ट रोल में रिकॉर्ड 2.89 करोड़ नाम हटाए गए हैं (कुल का लगभग 18.70%)। |
| कटौती का मुख्य कारण | मृत्यु, स्थायी पलायन और एक से अधिक स्थान पर पंजीकरण। | शहरी क्षेत्रों (लखनऊ-30%, गाजियाबाद-28%) में भारी पलायन और दोहरी प्रविष्टियाँ। |
| नए आवेदकों का जोड़ना | करीब 21.53 लाख नए पात्र मतदाताओं के नाम जोड़े गए। | नए पंजीकरण की प्रक्रिया (विशेषकर युवाओं और विदेश में जन्मे नागरिकों के लिए) अभी जारी है। |
| पंजीकरण की शुद्धता | 99% मतदाताओं का सत्यापन घर-घर जाकर पूरा किया गया। | लगभग 15.44 करोड़ में से 12.55 करोड़ मतदाताओं का डेटा अब तक रिटेन (बरकरार) किया गया है। |
बिहार में विदेशी नागरिकों की पहचान: मुख्य विवरण
बिहार विधानसभा चुनाव 2026 से पहले निर्वाचन आयोग द्वारा चलाए गए विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान के दौरान विदेशी नागरिकों और अवैध मतदाताओं की पहचान को लेकर निम्नलिखित आंकड़े सामने आए हैं:
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पहचाने गए संदिग्ध नागरिक: अभियान के दौरान लगभग 9,500 लोगों को अपात्र (Ineligible) घोषित किया गया। इनमें से एक बड़ा हिस्सा उन लोगों का था जिनके पास नागरिकता के पर्याप्त दस्तावेज नहीं थे या जो विदेशी मूल के संदिग्ध पाए गए।
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नोटिस की संख्या: सितंबर 2025 तक की रिपोर्ट के अनुसार, लगभग 3 लाख मतदाताओं को ‘संदिग्ध नागरिक’ (Doubtful Citizen) के रूप में नोटिस जारी किया गया था, जिनसे उनकी नागरिकता के प्रमाण मांगे गए थे।
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प्रमुख क्षेत्र: विदेशी नागरिकों (खासकर नेपाल, बांग्लादेश और म्यांमार मूल के) की सबसे अधिक पहचान सीमावर्ती जिलों में हुई है, जिनमें सुपौल, किशनगंज, अररिया, कटिहार और पूर्वी व पश्चिमी चंपारण शामिल हैं।
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नेपाली मूल की महिलाएं: पहचान किए गए लोगों में एक बड़ी संख्या उन नेपाली महिलाओं की भी थी, जिन्होंने स्थानीय नागरिकों से विवाह किया था लेकिन उनके पास भारतीय नागरिकता के औपचारिक दस्तावेज नहीं थे।
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दस्तावेजों का खुलासा: जांच में पाया गया कि कई विदेशी नागरिकों ने अवैध रूप से आधार कार्ड, राशन कार्ड और निवास प्रमाण पत्र जैसे भारतीय दस्तावेज बनवा लिए थे, जिसके आधार पर वे मतदाता सूची में शामिल हुए थे।


