गुरु जी की कलम से
सिद्धार्थनगर (बढ़नी): भारत-नेपाल सीमा पर स्थित नगर पंचायत बढ़नी और ढेबरुआ थाना क्षेत्र इन दिनों तस्करी का सुरक्षित चारागाह बन गया है। जिम्मेदार महकमों की कथित सुस्ती का फायदा उठाकर तस्करों ने पगडंडियों के रास्ते अपना साम्राज्य खड़ा कर लिया है। ताज्जुब की बात यह है कि बिना नंबर प्लेट वाली बाइकों का इस्तेमाल कर तस्कर न केवल रोजमर्रा का सामान, बल्कि नशीले पदार्थों की खेप भी बेखौफ होकर पार करा रहे हैं।
पगडंडियों के रास्ते फल-फूल रहा अवैध कारोबार
सूत्रों के मुताबिक, सीमावर्ती क्षेत्र के चमनगंज, आजाद नगर, कल्लन डिहवा, घरुआर, मड़नी, मलगहिया और सेमरहवा जैसे रास्तों से तस्करी का खेल चौबीसों घंटे चालू है। तस्कर इन रास्तों का उपयोग कर निम्नलिखित वस्तुओं की अवैध ढुलाई कर रहे हैं:
* व्यावसायिक सामान: कपड़ा, कॉस्मेटिक, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, मोबाइल और किराना आइटम।
* कृषि उत्पाद: खाद और बीज की अवैध खेप।
* ऑटो पार्ट्स: पुराने ट्रकों के इंजन और ब्रांडेड कंपनियों के डुप्लीकेट मोबिल, ग्रीस व बैरिंग। स्मैक के जाल में फंस रही युवा पीढ़ी
सबसे चिंताजनक पहलू स्मैक जैसे घातक मादक पदार्थों का बढ़ता कारोबार है। भारत से लेकर नेपाल तक फैला यह ‘काला कारोबार’ स्थानीय युवाओं के भविष्य को अंधकार में धकेल रहा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि जिम्मेदार अधिकारी इस बड़े सिंडिकेट पर हाथ डालने के बजाय कुछ छोटे प्यादों पर हल्की कार्रवाई कर केवल कागजी कोरम पूरा कर रहे हैं। पुराने इंजनों की नेपाल में भारी मांग
भारत से पुराने ट्रकों के इंजन और उनके कल-पुर्जे भारी मात्रा में नेपाल भेजे जा रहे हैं। इसका मुख्य कारण आर्थिक है—नेपाल में नए इंजनों की तुलना में भारत से आए पुराने इंजन काफी कम कीमत पर मिल जाते हैं। इसके साथ ही डुप्लीकेट स्पेयर पार्ट्स का एक बड़ा नेटवर्क कैरियरों के माध्यम से संचालित हो रहा है, जिससे तस्कर चांदी काट रहे हैं।
जिम्मेदारों की चुप्पी पर सवाल
खुली सीमा का लाभ उठाकर जिस तरह से तस्कर बिना किसी डर के अवैध गतिविधियों को अंजाम दे रहे हैं, उससे सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
क्या प्रशासन किसी बड़ी घटना या पूरी पीढ़ी के बर्बाद होने का इंतजार कर रहा है? स्थानीय नागरिकों ने उच्चाधिकारियों से इस संगठित तस्करी को रोकने के लिए सख्त कदम उठाने की मांग की है।