बाणगंगा बैराज में एक और दर्दनाक हादसा: सांस की बीमारी से परेशान युवक ने नदी में लगाई छलांग, मौत
Kapilvastupost
शोहरतगढ़, सिद्धार्थनगर
सिद्धार्थनगर जिले के शोहरतगढ़ स्थित बाणगंगा बैराज पर मंगलवार शाम एक और दर्दनाक हादसा हो गया। बैराज के फाटक संख्या 16 के उत्तरी तरफ कंक्रीट की बेंच पर बैठा 45 वर्षीय निजामुद्दीन (पुत्र मोहम्मद मजीद) अचानक नदी में कूद गया।
घटना शाम करीब चार बजे की है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, युवक को नदी में छलांग लगाते देख वहां मौजूद मछुआरों और बैराज कर्मियों ने तत्काल उसे बचाने की कोशिश की। कड़ी मशक्कत के बाद जाल डालकर उसे बाहर निकाला गया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। मृतक अपने पीछे पत्नी सकीना और 13 व 8 वर्ष की दो मासूम बेटियों को छोड़ गया है। घटना के बाद से ही परिजनों में कोहराम मचा हुआ है।
सूचना मिलते ही प्रभारी निरीक्षक मिथिलेश कुमार राय पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे और शव का पंचनामा करवाकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पुलिस के मुताबिक प्रथमदृष्टया मामला आत्महत्या का प्रतीत हो रहा है। जांच में यह बात भी सामने आई है कि मृतक लंबे समय से सांस फूलने (दमा/अस्थमा) की गंभीर बीमारी से परेशान था।
हर साल हादसों का केंद्र बनता बाणगंगा बैराज, सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
बाणगंगा बैराज स्थानीय स्तर पर हादसों और डूबने की घटनाओं के लिए संवेदनशील क्षेत्र बन चुका है। हर साल यहां डूबने या आत्महत्या की कई घटनाएं सामने आती हैं, जिससे सुरक्षा व्यवस्था को लेकर प्रशासन पर लगातार सवाल खड़े हो रहे हैं।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि बैराज पर पुलिसकर्मियों की तैनाती तो रहती है, लेकिन कंक्रीट बेंचों और खुले फाटकों जैसे संवेदनशील स्थानों पर लगातार गश्त न होने से ऐसे हादसों को रोकने में नाकामी मिलती है।
क्या है समाधान? स्थायी पुलिस चौकी और प्रभावी सुरक्षा की मांग
बैराज पर हो रही लगातार मौतों को देखते हुए स्थानीय लोगों ने प्रशासन से कड़े सुरक्षा इंतजामों की मांग की है:
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स्थायी पुलिस चौकी की स्थापना: बैराज परिसर के आसपास स्थायी पुलिस पिकेट या चौकी बने, ताकि 24 घंटे निगरानी रखी जा सके।
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सुरक्षा जाली और बाउंड्री: संवेदनशील फाटकों और बेंचों के आसपास मजबूत लोहे की जालियां लगाई जाएं, जिससे कोई भी आसानी से नदी में छलांग न लगा सके।
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सीसीटीवी और चेतावनी बोर्ड: बैराज के हर हिस्से में सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएं और जगह-जगह चेतावनी बोर्ड स्थापित किए जाएं।
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गोताखोरों और लाइफ जैकेट की तैनाती: आपात स्थिति से निपटने के लिए बैराज पर प्रशिक्षित गोताखोरों की स्थायी ड्यूटी लगाई जाए।


