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बांसी: राप्ती तट पर कवि सम्मेलन और मुशायरे में उमड़ा जनसैलाब, देशभक्ति और प्रेम के गीतों से सजी शाम
बांसी (सिद्धार्थनगर): माघ मेला के पावन अवसर पर शनिवार की रात राप्ती नदी के तट पर नगर पालिका द्वारा आयोजित ‘अखिल भारतीय कवि सम्मेलन और मुशायरा’ ऐतिहासिक रहा।
कड़ाके की ठंड के बावजूद श्रोताओं का उत्साह कम नहीं हुआ और देर रात तक लोग साहित्य की इस त्रिवेणी में डुबकी लगाते रहे।
कार्यक्रम का शुभारंभ कवि डॉ. सुशील सागर ने ‘सरस्वती वंदना’ से किया, जबकि गुले शबा ने अपनी सुरीली आवाज में ‘नात’ पेश कर माहौल को रूहानी बना दिया। इसके बाद कवियों और शायरों ने अपनी रचनाओं से समां बांध दिया। प्रमुख कवियों की गूंज
प्रख्यात कवि भूषण त्यागी ने अपनी पंक्तियों— “भूखा दिखाई दे न नंगा दिखाई दे, कोई फसाद न दंगा दिखाई दे”— के माध्यम से समाज को भाईचारे का संदेश दिया। वहीं, सायरा चांदनी शबनम ने “न तो हम अफगानी हैं और न हम जापानी हैं, हमको हक है इतराने का हम तो हिंदुस्तानी हैं” पढ़कर लोगों में देशभक्ति का जोश भर दिया।
रु़खसार बलरामपुरी ने अपनी गजल के शेरों से मुशायरे को नई बुलंदियों पर पहुँचाया।
इन दिग्गजों ने भी दी प्रस्तुति
कार्यक्रम में डॉ. ज्ञानेंद्र द्विवेदी ‘दीपक’, ब्रह्मदेव शास्त्री, सत्यप्रकाश गौतम, सैय्यद रिजवान, शाहब मजरूह, डॉ. राम कृष्ण लाल जगमग, डॉ. अजीत श्रीवास्तव, अर्चना श्रीवास्तव और शाकिर इनामी जैसे कई मशहूर नामों ने अपनी रचनाओं से खूब वाहवाही लूटी।
अतिथियों का सम्मान
कार्यक्रम की अध्यक्षता पूर्व सांसद डॉ. चंद्रशेखर त्रिपाठी ने की और संचालन शायर अकमल बलरामपुरी ने किया। इस अवसर पर नगर पालिका अध्यक्ष चमन आरा राइनी, पूर्व नपा अध्यक्ष मो. इदरीश पटवारी और ईओ जय प्रकाश सिंह यादव ने अतिथियों को स्मृति चिन्ह और अंगवस्त्र भेंटकर सम्मानित किया। कार्यक्रम में सिने स्टार अली खान, नायब तहसीलदार चंद्र प्रकाश श्रीवास्तव समेत भारी संख्या में गणमान्य नागरिक और साहित्य प्रेमी मौजूद रहे।