शोहरतगढ़ से सटे गौहनिया में भी पांच वर्ष पूर्व रेलवे अंडर ब्रिज बनाए जाने के प्रस्ताव और सर्वे को लेकर ग्रामीणों के कड़े विरोध के बाद निर्माण कार्य रोक दिया गया । आज भी वहां सामान्य रूप से आवागमन हो रहा है।
परमात्मा उपाध्याय की रिपोर्ट
सिद्धार्थनगर, उत्तर प्रदेश: सिद्धार्थनगर के बढ़नी विकास खंड के अंतर्गत मड़नी गांव के ग्रामीणों ने रेलवे अंडरब्रिज बनाने का कड़ा विरोध किया है। उनका कहना है कि इस अंडरब्रिज से उनकी खेती-किसानी पर गहरा संकट आ जाएगा। गांव के सैकड़ों लोग शुक्रवार को रेलवे फाटक पर जमा हुए और विरोध प्रदर्शन किया, जिसके बाद उन्होंने सांसद, विधायक, जिलाधिकारी और रेलवे अधिकारियों को एक हस्ताक्षरित शिकायत पत्र सौंपने की बात कही है।
खेती के लिए ज़रूरी रास्ता होगा बंद
ग्रामीणों का कहना है कि उनकी ज़्यादातर खेती की ज़मीन रेलवे लाइन के पार नेपाल बॉर्डर की तरफ़ है। खेती-किसानी के लिए ट्रैक्टर-ट्रॉली और कंबाइन जैसी बड़ी मशीनों को ले जाने का यही एकमात्र रास्ता है। प्रस्तावित अंडरब्रिज की ऊँचाई कम होने की वजह से कंबाइन मशीनें इसके नीचे से नहीं निकल पाएंगी। इससे फसलों की कटाई और बुवाई में बड़ी समस्या आएगी, जिससे उनकी खेती चौपट हो सकती है।
पूर्व ग्राम प्रधान जमील अहमद ने बताया कि कंबाइन मशीन की ऊँचाई लगभग 20 फ़ुट होती है। मौजूदा अंडरब्रिज में इतनी ऊँचाई नहीं होगी, जिससे कृषि कार्य पूरी तरह से प्रभावित होगा। उन्होंने यह भी बताया कि बारिश के दिनों में ऐसे अंडरपास में पानी भर जाता है, जिससे रास्ता पूरी तरह से बंद हो जाता है। किसान गुड्डू भैया ने भी इस बात की पुष्टि करते हुए कहा कि उनका गांव निचली ज़मीन पर होने की वजह से नेपाल से आने वाले पानी से भी घिर जाता है।
प्रशासन से की काम रोकने की मांग
ग्राम प्रधान पूजा और अन्य ग्रामीणों जावेद खान, राजेन्द्र सिंह, फिरोज खान, सुनील यादव और वसीम खान ने मीडिया के माध्यम से प्रशासन से न्याय की गुहार लगाई है। उन्होंने जल्द ही मांग पत्र सौंपकर इस अंडरपास के काम को तुरंत रोकने की मांग की है। उनका कहना है कि इस समस्या का समाधान करने के लिए रेलवे और स्थानीय प्रशासन को मिलकर कोई दूसरा विकल्प खोजना चाहिए ताकि ग्रामीणों की आजीविका पर कोई संकट न आए।
पांच वर्ष पूर्व भी हुआ था सर्वे
गांव के जानकार बड़े बुजुर्ग बताते हैं कि पांच वर्ष पूर्व भी इसी प्रकार का सर्वे निर्माण कार्य के लिए किया गया था लिखा पढ़ी करने के बाद रेलवे ने इसे स्वीकृति नहीं दी ।