पैगंबर इस्लाम, मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) के जुलूस, जिन्हें अक्सर ‘ईद मिलाद उन-नबी’ या ‘जुलूस-ए-मोहम्मदी’ के नाम से जाना जाता है, इस्लाम धर्म के अनुयायियों के लिए एक बहुत ही महत्वपूर्ण और पवित्र अवसर होते हैं। ये जुलूस दुनिया भर में पैगंबर मुहम्मद के जन्मदिन के उपलक्ष्य में मनाए जाते हैं, जो इस्लामी कैलेंडर के अनुसार रबीउल अव्वल महीने की 12 तारीख को होता है। ये जुलूस केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि एकता, प्रेम और भाईचारे का प्रतीक भी हैं।
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आज जुमा के दिन बांसी कस्बे में लगभग आठ बजे जुलूस ए मोहम्मदी का आगाज हुआ जिसमें बांसी कस्बे की जनता ने बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया । परंपरागत रूट से होते हुए चौराहों गलियों प्रमुख मार्गों पर जगह जगह सजावटी गेट से गुजरते हुए निकला इस दौरान शहर ए काजी ने पैगंबर मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मोहम्मद साहब का जीवन मानवता के लिए एक प्रेरणा है।
इन जुलूसों का मुख्य उद्देश्य उनके जीवन, उनकी शिक्षाओं और उनके महान आदर्शों को याद करना है। इन जुलूसों में शामिल होने वाले लोग पैगंबर के बताए रास्ते पर चलने का संकल्प लेते हैं, जो शांति, सद्भाव, न्याय और करुणा पर आधारित है। यह जुलूस लोगों को उनके चरित्र, सादगी और त्याग के बारे में बताया गया ।
पैगंबर मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) के जुलूस में कई तरह की गतिविधियां शामिल रही हैं। लोग बड़ी संख्या में सड़कों पर उतरकर धार्मिक नारे लगाते हैं, जैसे ‘नारा-ए-तकबीर, अल्लाहु अकबर’ और ‘नारा-ए-रिसालत, या रसूल अल्लाह’। जुलूस में इस्लामिक झंडे और बैनर भी लहराए जाते हैं, जिन पर पैगंबर मुहम्मद की प्रशंसा में लिखे गए शेर और आयतें लिखी हुई थीं ।
इसके अलावा, जुलूस के दौरान अक्सर नात और मनकबत (पैगंबर की प्रशंसा में लिखी गई कविताएँ) पढ़ी जाती हैं, जो लोगों में एक विशेष प्रकार का आध्यात्मिक उत्साह पैदा करती रही। कई स्थानों पर, जुलूस के बाद सभाएं भी हुई , जहां उलमा (इस्लामी विद्वान) पैगंबर के जीवन के विभिन्न पहलुओं पर रोशनी डाली। इन सभाओं का उद्देश्य लोगों को धार्मिक ज्ञान देना और उन्हें सही रास्ते पर चलने के लिए प्रेरित करते दिखे।
बताते चलें कि जुलूस-ए-मोहम्मदी का सामाजिक प्रभाव भी बहुत गहरा होता है। ये जुलूस विभिन्न समुदायों के लोगों को एक साथ लाते हैं, जिससे आपसी भाईचारा और एकता को बढ़ावा मिलता है। कई स्थानों पर, इन जुलूसों के दौरान जरूरतमंदों को भोजन और दान भी दिया जाता है, जो पैगंबर मुहम्मद की शिक्षाओं के अनुरूप है, जिसमें गरीबों और असहायों की मदद करने पर विशेष जोर दिया गया है। इस मुबारक मौके पर इदरीस पटवारी ने मुस्लिम समुदाय को मुबारकबाद दी।
यह जुलूस पैगंबर मुहम्मद के प्रेम और दया के संदेश को फैलाते हैं, जो केवल मुसलमानों तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरी मानवता के लिए है। ये जुलूस हमें याद दिलाते हैं कि सच्चा इस्लाम शांति, क्षमा और आपसी सम्मान का धर्म है।
कुल मिलाकर, पैगंबर इस्लाम मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) के जुलूस धार्मिक आस्था, सामाजिक सद्भाव और मानवीय मूल्यों का एक अद्भुत संगम हैं। इस दौरान न पा अध्यक्ष इदरीश पटवारी , गोलू , राशिद,अफजल , पप्पू सभासद सहित हजारों की संख्या में मुस्लिम समुदाय उपस्थित रहा।