Thursday, February 12, 2026
बढ़नी

किसानों ने उठाई ‘किसान कार्ड’ की मांग: राशन कार्ड की तरह मिले खाद और बीज

Kapilvastupost

बढ़नी, उत्तर प्रदेश: क्षेत्र के किसानों ने सरकार से राशन कार्ड की तर्ज पर ‘किसान कार्ड’ बनाने की मांग की है। उनका मानना है कि इससे खाद और बीज की कालाबाजारी पर रोक लगेगी और किसानों को समय पर उनके हिस्से की सामग्री मिल सकेगी। किसानों का कहना है कि यूरिया और डीएपी जैसे खाद को लेने में उन्हें काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। लंबी लाइनों में लगने के बावजूद कई बार वे खाली हाथ लौट जाते हैं।

क्यों हो रही है ‘किसान कार्ड’ की मांग?

  • तस्करी और कालाबाजारी: किसानों का आरोप है कि आधार कार्ड के जरिए तस्कर और नेपाल के नागरिक भारतीय किसानों के हिस्से का खाद ले जाते हैं। इससे असली किसानों को जरूरत के समय खाद नहीं मिल पाता।

  • घाटे का सौदा: समय पर खाद और बीज न मिलने से फसल की पैदावार प्रभावित होती है, जिससे खेती घाटे का सौदा बन रही है। इसी वजह से युवा पीढ़ी खेती से दूर हो रही है।

  • सब्सिडी का बोझ: किसान नेताओं का कहना है कि अगर ‘किसान कार्ड’ के जरिए रकबे (खेत के क्षेत्रफल) के हिसाब से सब्सिडी दी जाए तो सरकार पर भी सब्सिडी का बोझ कम होगा। तस्करों को सब्सिडी न मिलने से उन्हें खाद-बीज महंगा पड़ेगा, जिससे तस्करी खुद-ब-खुद रुक जाएगी।

प्रशासन का रुख

​जब इस मामले में जिला कृषि अधिकारी मो. मुजम्मिल से संपर्क करने की कोशिश की गई, तो उन्होंने मीडिया से बात नहीं की और फोन उठाना बंद कर दिया। वहीं, जिलाधिकारी राजा गणपति आर के सहयोगी ने बताया कि यह संदेश डीएम तक पहुंचा दिया जाएगा और इस पर विचार किया जाएगा।

​इस मांग को क्षेत्र के कई किसानों जैसे कृष्ण मोहन चौधरी, जयप्रकाश, शैले यादव, भीखी, मुराली आदि ने मिलकर उठाया है, जो उम्मीद कर रहे हैं कि सरकार उनकी इस समस्या पर ध्यान देगी।