Thursday, February 12, 2026
बढ़नीशोहरतगढ़

खाद वितरण में बड़ा घोटाला: किसानों को पर्ची देकर भी नहीं मिली खाद, विधायक ने किया पर्दाफाश

गुरु जी की कलम से 

सिद्धार्थनगर, उत्तर प्रदेश: सिद्धार्थनगर जिले के बढ़नी विकासखंड स्थित साधन सहकारी समिति बैरिहवा में किसानों के साथ खाद वितरण के दौरान हुई बदसलूकी और धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। किसानों का आरोप है कि उन्हें खाद की पर्ची देने के बाद भी यूरिया नहीं दी गई, जबकि उनका पैसा ले लिया गया। इस पूरे मामले में शोहरतगढ़ विधानसभा के विधायक विनय वर्मा ने बड़े अधिकारियों की मिलीभगत और साजिश का पर्दाफाश किया है।

किसानों के साथ धोखाधड़ी

​बैरिहवा समिति में खाद वितरण के समय शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस और तहसील के कर्मचारी भी मौजूद थे। इसके बावजूद, किसानों को पैसा लेकर पर्ची दी गई लेकिन खाद नहीं दी गई। कुछ किसान पर्ची हाथ में लिए बिना खाद पाए ही वापस लौट गए। किसानों ने यह भी आरोप लगाया कि रजिस्टर में तीन बोरी यूरिया दर्ज की गई, जबकि उन्हें सिर्फ दो बोरी की पर्ची दी गई। विरोध करने पर समिति के कर्मचारियों ने उन्हें जबरदस्ती वहां से हटा दिया और गोदाम में ताला लगा दिया।

विधायक ने खोली पोल

​शोहरतगढ़ विधायक विनय वर्मा ने ग्रामीण सहकारी समिति सेहुडा में यूरिया खाद को लेकर परेशान जनता का एक वीडियो सोशल मीडिया पर डाला था, जिसमें उन्होंने अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग की थी। इसके तुरंत बाद, समिति के बाहर एक नोटिस लगा दिया गया, जिसमें बताया गया कि संबंधित सचिव आशीष चौधरी बीमार हैं और अस्पताल में भर्ती हैं। इस आशय की तस्वीर भी सोशल मीडिया पर डाल दी गई।

​विधायक तब हैरान रह गए जब यही कथित बीमार सचिव विनय वर्मा के आवास पर जनता दरबार में चुपचाप आकर बैठ गया। पूछताछ करने पर सचिव बहाने बनाने लगा, जिससे यह साफ हो गया कि अधिकारियों की मिलीभगत से यह सब किया जा रहा था। विधायक ने इस घटना से जुड़ी तस्वीरें भी सोशल मीडिया पर साझा कीं, ताकि जनता अधिकारियों की साजिश को देख सके।

उच्च स्तरीय जांच की मांग

​विधायक विनय वर्मा ने कहा कि यह आपराधिक लापरवाही है और अधिकारी जनप्रतिनिधियों के खिलाफ साजिश रचकर राज्य सरकार की छवि खराब कर रहे हैं। उन्होंने इस पूरे मामले की जानकारी कृषि मंत्री और अन्य आला अधिकारियों को देते हुए उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। उन्होंने कहा कि दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जानी चाहिए। साथ ही, उन्होंने यह भी पूछा कि जब सचिव बीमार था तो वह उनके आवास पर कैसे पहुंचा और किसकी शह पर आया।