राहुल और तेजस्वी का एक साथ आना क्या बिहार में सत्ता परिवर्तन के संकेत
परमात्मा उपाध्याय की रिपोर्ट
राहुल गांधी की ‘वोट अधिकार यात्रा’ से बिहार में कांग्रेस और इंडिया गठबंधन को कितना फायदा होगा, यह तो आने वाले वक्त में ही पता चलेगा, लेकिन इस यात्रा ने कई महत्वपूर्ण संकेत दिए हैं। सबसे खास बात यह रही कि राहुल गांधी को इस बार बिहार में लोगों का भरपूर समर्थन मिला। उनकी जनसभाओं में भीड़ भी खूब जुटी और लोगों ने उनके भाषणों को ध्यान से सुना। राहुल के इस अभियान में सबसे बड़ा मुद्दा ‘वोट की चोरी’ रहा, जिसे बिहार की जनता पसंद कर रही है।
पप्पू यादव और तेजस्वी यादव का मेल-मिलाप
इस यात्रा से एक और बड़ा संदेश सामने आया है – पप्पू यादव और तेजस्वी यादव के बीच की कटुता का अंत। लंबे समय से दोनों परिवारों के बीच चल रही तल्खी जगजाहिर थी। पूर्णिया लोकसभा चुनाव में पप्पू यादव के निर्दलीय लड़ने के पीछे भी लालू यादव का हाथ माना जाता है। हालाँकि, ‘वोट अधिकार यात्रा’ के दौरान पूर्णिया में पप्पू यादव ने तेजस्वी यादव का शानदार स्वागत किया और उन्हें ‘बिहार का जननायक’ बताया। इस घटना को दोनों यादव परिवारों के बीच सब कुछ ठीक होने के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस मेल-मिलाप से कांग्रेस और आरजेडी गठबंधन को काफी फायदा मिल सकता है, खासकर बिहार के सीमांचल क्षेत्र में।
पप्पू यादव का राजनीतिक कद
पप्पू यादव बिहार की राजनीति के एक मजबूत स्तंभ माने जाते हैं। सबसे कम उम्र में विधायक बनने और सर्वाधिक बार निर्दलीय सांसद बनने का रिकॉर्ड उनके नाम है। 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले उन्होंने अपनी पार्टी ‘जन अधिकार पार्टी’ का विलय कांग्रेस में कर दिया था और पूर्णिया से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ना चाहते थे। आरजेडी ने उन्हें टिकट नहीं लेने दिया, जिसके बाद वे निर्दलीय लड़े और जीते भी। यह उनकी राजनीतिक ताकत को दर्शाता है।
कांग्रेस की जमीन पर वापसी की कोशिशें
बिहार में कांग्रेस लगातार अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश कर रही है। ‘वोट अधिकार यात्रा’ से पहले कांग्रेस ने ‘रोजगार दो या गद्दी छोड़ो’ आंदोलन चलाया था, जिसमें देशभर के नामी कांग्रेसी नेताओं ने हिस्सा लिया था। यह आंदोलन काफी सफल रहा। इससे पहले कन्हैया कुमार ने भी युवाओं के रोजगार और पलायन के मुद्दे पर पदयात्रा की थी। ये सब प्रयास बिहार में कांग्रेस की कमजोर होती पकड़ को मजबूत करने की दिशा में उठाए गए कदम हैं।
वोटर्स की छंटनी और ‘वोट अधिकार यात्रा’
इंडिया गठबंधन के लिए ‘वोट अधिकार यात्रा’ शुरू करने की जरूरत चुनाव आयोग के उस फैसले के बाद पड़ी, जिसमें ‘एसआईआर’ (Special Investigation Report) के जरिए बिहार के 65 लाख वोटरों को वोटर लिस्ट से हटा दिया गया। इस मुद्दे को लेकर राहुल और तेजस्वी ने मोदी सरकार और चुनाव आयोग पर तीखे हमले किए हैं। कांग्रेस विधायक नीतू सिंह का कहना है कि यह लड़ाई वोटरों की नहीं, बल्कि ‘वोट के अधिकार’ की है। यह मुद्दा गठबंधन को लोगों के बीच एक मजबूत आधार दे सकता है, क्योंकि यह सीधे तौर पर आम जनता के अधिकार से जुड़ा है।
क्या यह अभियान और पप्पू यादव-तेजस्वी यादव का साथ आना आगामी विधानसभा चुनावों में इंडिया गठबंधन के लिए गेम-चेंजर साबित होगा?
परमात्मा उपाध्याय देश के कई जानी मानी अखबारों में लिखते है उनकी की लेखनी में एक शिक्षक की स्पष्टता और एक पत्रकार की पैनी दृष्टि का मेल है। उनकी कलम समाज को शिक्षित करने का कार्य करती है, जहाँ वे सच्चाई को बिना किसी लाग-लपेट के प्रस्तुत करते हैं। उनकी लेखनी सरल और सीधी है, जो हर वर्ग के पाठक को सहजता से समझ आ जाती है। यह न केवल जानकारी देती है, बल्कि सामाजिक चेतना और विचारों को भी जगाती है।