Saturday, October 10, 2026
बढ़नी

बढ़नी बॉर्डर पर नशीले पदार्थों की बड़ी खेप बरामद: 5 महिला तस्कर गिरफ्तार, ‘कैरिंग’ के जाल में फंसकर भारतीय जेलों में बंद हो रहे नेपाली नागरिक

Kapilvastupost

सिद्धार्थनगर/बढ़नी। भारत-नेपाल सीमा पर नशीले पदार्थों की तस्करी के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान में नेपाल पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। बढ़नी बॉर्डर के समीप कपिलवस्तु जिले के कृष्णनगर क्षेत्र से पुलिस ने पांच महिला तस्करों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से 5.225 किलो शुद्ध चरस और 10 किलो अफीम जब्त की है।

पुराने बस पार्क के पास हुई कार्रवाई कपिलवस्तु पुलिस के डीएसपी एवं सूचना अधिकारी रिपेंद्र कुमार सिंह के अनुसार, कृष्णनगर नगरपालिका-2 स्थित पुराने बस पार्क क्षेत्र में गश्त के दौरान संदिग्ध गतिविधियों के आधार पर महिलाओं को रोका गया। तलाशी के दौरान दाङ जिले की 34 वर्षीय रतिमा रोका के पास से 5.225 किलो चरस बरामद हुई। वहीं, कपिलवस्तु विजयनगर की फनिसरा सारू (45 वर्ष) और नन्सरी घर्ती मगर (56 वर्ष) के पास से 5-5 किलो अफीम जब्त की गई। इसके अलावा नेटवर्क में शामिल दाङ की विमला पुन (43 वर्ष) और पर्सा जिले की चुमा लामिछाने (48 वर्ष) को भी गिरफ्तार किया गया है।

‘कैरिंग’ के चक्कर में जेल पहुंच रहे बेखबर नेपाली नागरिक यह मामला सिर्फ एक गिरफ्तारी तक सीमित नहीं है, बल्कि सीमावर्ती क्षेत्रों में पनप रहे ‘कैरिंग’ (सामान पार कराने के बदले मिलने वाली दिहाड़ी/मजदूरी) के खतरनाक नेटवर्क की ओर इशारा करता है। नेपाल और भारत के सीमावर्ती इलाकों में सक्रिय बड़े ड्रग माफिया और तस्कर अक्सर गरीब, बेरोजगार और आर्थिक रूप से कमजोर नेपाली नागरिकों, विशेषकर महिलाओं, को थोड़े से पैसों का लालच देकर ड्रग्स की ‘कैरिंग’ में लगा देते हैं।

माफिया केवल सामान एक तरफ से दूसरी तरफ पहुंचाने (कैरिंग) के एवज में इन्हें चंद रुपये देते हैं, लेकिन पकड़े जाने पर मुख्य सरगना बच निकलते हैं और ये मोहरे कानून के शिकंजे में फंस जाते हैं। यही कारण है कि आज ‘कैरिंग’ के इस फर्जी और खतरनाक जाल में फंसकर सैकड़ों की संख्या में नेपाली नागरिक भारतीय जेलों में बंद हैं और अपनी जिंदगी बर्बाद कर रहे हैं।

नेटवर्क के मुख्य आकाओं की तलाश जारी पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जब्त नशीले पदार्थों को लैब टेस्ट के लिए भेज दिया गया है। गिरफ्तार महिलाओं से पूछताछ की जा रही है ताकि भारत में माल प्राप्त करने वाले संपर्कों और इस पूरे ‘कैरिंग’ व तस्करी नेटवर्क के मुख्य आकाओं का पता लगाया जा सके।