Friday, February 13, 2026
बढ़नी

नगर पंचायत बढ़नी बाजार में भ्रष्टाचार का बड़ा खुलासा: फर्जी FDR और अवैध कब्जों पर चेयरमैन ने घेरा

Kapilvastupost
सिद्धार्थनगर (बढ़नी): नगर पंचायत बढ़नी बाजार में प्रशासनिक कार्यप्रणाली को लेकर बड़ा टकराव सामने आया है। नगर पंचायत अध्यक्ष सुनील अग्रहरि ने एक प्रेस वार्ता के दौरान अधिशासी अधिकारी (EO) की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए वित्तीय अनियमितता और विकास कार्यों में शिथिलता के सनसनीखेज आरोप लगाए हैं।
फर्जी FDR का मामला आया सामने
चेयरमैन सुनील अग्रहरि ने आरोप लगाया कि ‘हरजी ट्रेडर्स’ नामक फर्म द्वारा कान्हा गौशाला से संबंधित एक टेंडर में लगभग 11.92 लाख रुपये की कथित फर्जी FDR लगाई गई है। बैंक स्तर से पुष्टि होने के बावजूद अब तक इस मामले में कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। उन्होंने इसे नगर पंचायत की पारदर्शिता और वित्तीय अनुशासन पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न बताया है।
सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे और विकास में बाधा
प्रेस वार्ता के दौरान अध्यक्ष ने सरकारी भूमि, विशेषकर पशुचर और सार्वजनिक उपयोग की जमीनों पर हो रहे अवैध कब्जों का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि:
* क्षेत्र में लगातार अतिक्रमण की शिकायतें मिल रही हैं, लेकिन प्रशासन मौन है।
* विकास कार्यों में ठेकेदारों की लापरवाही के बावजूद उन पर कठोर कार्रवाई नहीं हो रही है।
* जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करने में जानबूझकर देरी की जा रही है और ‘सुविधा शुल्क’ की शिकायतें मिल रही हैं।
कर्मचारियों के वेतन पर स्पष्टीकरण
कर्मचारियों के बीच फैल रहे भ्रम को दूर करते हुए अध्यक्ष ने कहा कि उन्होंने अधिकांश कर्मचारियों का वेतन जारी करने की सहमति पहले ही दे दी थी। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग कर्मचारियों को गुमराह कर रहे हैं ताकि भ्रष्टाचार के वास्तविक मुद्दों से ध्यान भटकाया जा सके।
अधिशासी अधिकारी का पक्ष
दूसरी ओर, अधिशासी अधिकारी अजय कुमार ने इन सभी आरोपों को निराधार बताया है। उनका कहना है कि नगर पंचायत के सभी कार्य शासनादेश और नियमानुसार ही संचालित हो रहे हैं।
उच्च स्तरीय जांच की मांग
चेयरमैन सुनील अग्रहरि ने स्पष्ट किया कि इन सभी बिंदुओं की जानकारी उच्चाधिकारियों को लिखित रूप में दे दी गई है। उन्होंने मामले की निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच की मांग की है और चेतावनी दी है कि यदि स्थानीय स्तर पर सुनवाई नहीं हुई, तो वे इस मामले को शासन स्तर (लखनऊ) तक ले जाएंगे।